Post office FD scheme: पोस्ट ऑफिस में 1 लाख कि फिक्स्ड डिपॉजिट करेंगे तो 5 साल में इतना पैसा मिलेगा। नई ब्याज दर के साथ नए नियम

Post office FD scheme

Post office FD scheme: पोस्ट ऑफिस में 1 लाख कि फिक्स्ड डिपॉजिट करेंगे तो 5 साल में इतना पैसा मिलेगा। नई ब्याज दर के साथ नए नियम

पोस्ट ऑफिस में 1 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) 5 साल के लिए कराने पर, नई ब्याज दर 7.5% प्रति वर्ष (p.a.) के अनुसार, निवेशक को कुल लगभग ₹1,38,567 की राशि मिलेगी। इस ब्याज की गणना त्रैमासिक संयोजित (quarterly compound) होती है, जिससे मूलधन के साथ ब्याज भी बढ़ता है।

पोस्ट ऑफिस FD स्कीम के नए नियम और ब्याज दरें

FD की वर्तमान ब्याज दरें 1 साल के लिए 6.9%, 2 साल के लिए 7.0%, 3 साल के लिए 7.1% और 5 साल के लिए 7.5% हैं।

न्यूनतम निवेश राशि ₹1,000 है, जबकि आप अपनी सुविधा अनुसार ₹1 लाख तक या उससे अधिक भी जमा कर सकते हैं।

FD का टेन्योर 1, 2, 3, और 5 साल के विकल्प के रूप में होता है।ब्याज त्रैमासिक संयोजित (quarterly compounding) होता है, जिससे आपको ज्यादा लाभ मिलता है।

पोस्ट ऑफिस FD में नामांकन का विकल्प उपलब्ध है।

FD पर जमा राशि के लिए 6 महीने बाद आंशिक निकासी संभव है, लेकिन इससे ब्याज दरों पर प्रभाव पड़ सकता है।

पोस्ट ऑफिस टैक्स सेविंग FD भी उपलब्ध है, जिसकी ब्याज दर 7.5% है और यह 5 साल की अवधि के लिए होता है।

1 लाख के निवेश पर 5 वर्ष बाद मिलने वाली राशि

यदि आप ₹1,00,000 की FD 5 साल के लिए पोस्ट ऑफिस में लगाते हैं तो ब्याज दर 7.5% p.a. के अनुसार संयोजित ब्याज के साथ मैच्योरिटी पर लगभग ₹1,38,567 प्राप्त होंगे।

इसका मतलब आपको 5 साल में ₹38,567 का शुद्ध लाभ होगा।

यह योजना सुरक्षित है क्योंकि यह सरकार द्वारा समर्थित है।

निवेश के फायदे

सुरक्षित निवेश विकल्प है क्योंकि भारत सरकार की गारंटी मिलती है।

बैंक एफडी की तुलना में बेहतर ब्याज दरें मिलती हैं।

टैक्स सेविंग FD विकल्प से टैक्स लाभ भी मिलता है।नियमित और सरल प्रक्रिया से आसानी से निवेश कर सकते हैं।

यह नई ब्याज दर और नियम 1 जुलाई 2025 से लागू हैं, जो निवेशकों को बेहतर रिटर्न का अवसर देते हैं। पोस्ट ऑफिस FD उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो जोखिम से बचते हुए सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं और 5 साल की अवधि में अच्छा रिटर्न पाना चाहते हैं।निवेश करते समय हमेशा अपनी वित्तीय स्थिति और लक्ष्यों को ध्यान में रखें और यदि आवश्यक हो तो वित्तीय सलाहकार की मदद लें।

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